GPS technology in Hindi | GPS kya hai

GPS technology in Hindi | GPS kya hai

 

GPS kya hai? एक टाइम था जब हम कही जाने के लिए निकलते थे तो पुरा का पुरा पता लेकर निकलते थे ताकी अपनी जगह ढूढने में परेशानी न हो अगर कोई परेशानी आती तो हमारे मार्गदर्शक बनते चौराहे की दुकान वाले भईया रिक्शा वाले भईया ठेले वाले या तो पान वाले भईया फिर जैसे तैसे पूछते पूछते हम सही loction में पहुंचते तो जहा जा रहें हैं उनकी ओर से कोई लेजाने भी आता था ताकी सही गली और सही मकान तक हम पहुंच सके , और आज कल हम और आप मोबाईल निकलते हैं google पर सर्च करते है और सीधे डैरेक्शन वाले निशान पर क्लिक कर देते है और google map हमे हमारे रास्त दिखा देता है सिंपली कहे तो किसी अनजान जगह पर google map हम जैसे लोगों के लिए अंधे की लाठी जैस काम करत है आप रनिंग या साइकलिंग करने जाते है तो जो डिस्टेंस आप कवर करते है उसका पता भी अपको GPS से ही पता चलता है google map जिस techonogy पर चलता है उसे कहते है GPS यानी global pogcniy syestm इसी technolgy ने हमरी जिंदगी इतनी आसान बना दी है की छोटे से छोटा एड्रेस दुकान होटल, ढाबा गैरेज लगभग सभी कुछ map पर अवेलेबल है अपने live location share करने वाला फीचर जब से व्हाट्सएप पर आया है तब से अनर्जिस्टर address पर भी हम लोगों को बुला लेते है और चले भी जाते हैं । तो आज tech bholu की ये डोकोमेंट्री आप को ले जायेगी GPS की नोलेजबल इंफ्रोमेटिव एंड हाईटेक सफर में तो चलिए शुरू करते है

 

GPS technology, techbholu. Com
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GPS जिसका फूल फ्रॉम है global pogcniy syestm ये एक मेलेट्रीय इनवेंशन है इसका नाम था Navstar और इसका सेटेलाइट 1978 में लॉन्च हुआ लेकीन सभी navstar सेटलाइज को और ऑरबिट में भेजने के लिए नहीं बनया गया था us में GPS पूरी तरह से 1995 में काम करने लग लेकीन साल 2000 तक हाई क्वालिटी सिग्नल सिर्फ मेलेट्रिय परपोस के लिए थे उसके बाद आम लोगों के लिए इसे एक फ्री सर्विस के तरह उपयोग में सुरु किया गया आज USA में GPS technology है उसे USA airforce मैनेज करती है आज कल जो रिसीवर है वो GPS के साथ साथ रसिया के glona के सेटेलाइट से कनेक्टेड रहते है ताकी दुनियां के किसी भी कोने में सही लोकेशन के जानकारी भेज जा सके GPS की खास बात ये भी है इसे काम करने के लिए intrnet conection या फ़ोन के सिग्नल के जरूर नही पड़ती है लेकीन इंट्रनेट कनेक्शन और सिग्नल के साथ ये जबरदस्त एफिसेंसी बन जाती है GPS अब लगभग हर जगह यूज हो रहा है ।

 

चलिए अब ये technology पर काम कैसे करती है उसके बारे में जानते है

 

GPS के काम करने के तीन बेसिक पार्ट्स है 

 

1 – testelight 

2 – grwond tention 

3 – ricivers 

 

अगर सेटेलाइट की बात करे तो जैसे हमारे पूर्वज तारो को देख कर अपनी दिशा और जगह के अंदाजा लगते थे वही काम आज की मॉडल सेटेलाइट करते है इन्हे काम करने के लिए सही समय और सही जगह पर होना जरूरी है upgrownd टेशनेंशन आपने eror से ये पता लगते हैं की सेटेलिथ आखिर है कहा ये वही है न जहा इसे होना चाहिए अब आपके कार मोबाईल या किसी दूसरे डिवाइस में अगर map है तो उसका जो रिसीवर होता है वो ये पता करता है की सेटेलाइट से वो कितनी दूर है जब रिसीवर को ये पता लग जाता है की ऐसे चार सेटेलाइट से वो कितनी दूर है तो वही अपकी लोकेशन होती है और ये इतनी एक्यूरेट होता है कि आप कितने किलोमीटर दूर है इसकी जानकारी भी अपकी रिसीविंग डिवाइस या मोबाईल पर दिखने लगती है ,USA के GPS System में 32 सेटेलाइट है को पृथ्वी में घूम रहे हैं इनमे से 24 core satellites है और बाकी के 8 रिप्लेसमेंट के लिए है अगर इन 24 में से किसी सेटेलाइट में प्रोब्लम आ जाए तो ये 8 सेटेलाइट एमरजेंसी के लिए है 24घंटे नॉनस्टॉप काम करने के लिए इनकी मॉनिटरिंग मेनांटेनेसा और रिपेयरिंग का काम भी देखना होता है इतना करने के बाद ये 10साल ही अपनी सर्विस दे पाते हैं इनको कुछ इस तरह बनाया गया होता है ये सभी कंडीशन में काम कर सके , लेकीन इन सब के बीच सबसे जरूरी point है अपके मोबाईल या रिसीविंग डिवाइस का चार सेटेलाइट के साथ कनेक्ट रहन तभी आपकी अपनी लोकेशन मिलती है ।

 

तो दोस्तों ये है GPS के टेक्नोलोजी आपकों समझ में आ गया होगा GPS काम कैसे करत है

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